कई बार आप अपना फ़ोन नंबर किसी को देना नहीं चाहते हैं.
चाहे कारण कोई भी हो, ऐसा भी होता है कि कुछ दिनों के बाद आप अपना नंबर बदलना चाहते हों.
अगर आप कुछ दिनों तक छुट्टी पर हैं और उस दौरान एक नया नंबर चाहते हैं तो ऐसा करना बहुत आसान है.
मूल बात ये है कि अगर आपके पास एक मोबाइल फ़ोन नंबर है और आप दूसरा नंबर चाहते हैं तो उसके लिए भी ऐप की दुनिया ने एक हल निकाल लिया है.
बस 'टेक्स्टमी' नाम का ऐप डाउनलोड करके इस्तेमाल कीजिए और आप किसी को कॉल या मैसेज कर सकते हैं बिना उन्हें अपना असली नंबर बताए हुए.
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ये अलग-अलग नंबर आप अपने 'टेक्स्टमी' अकाउंट से मैनेज कर सकते हैं और अगर किसी नंबर का इस्तेमाल करना बंद हो गया है तो उसके बाद उसे डिलीट भी कर सकते हैं.
जो नंबर आपके नाम होगा, वो यूरोप का, अमरीका के देश का होगा और उस देश के कोड के साथ कॉल रिसीव करने वाले के फ़ोन पर दिखेगा.
लेकिन अगर आपको एक से ज़्यादा नंबर चाहिए तो उसके लिए आपको कम से कम 60 रुपये हर महीने के देने होंगे.
अगर सिर्फ एक नंबर इस्तेमाल करना है तो वो फ्री है. इन नंबरों पर आप जितने चाहे कॉल या एसएमएस कर सकते हैं.
बस शर्त ये है कि आपको कुछ विज्ञापन देखने होंगे.
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कुछ देशों में 'स्विच', 'बर्नर' या 'शफ़ल' के नाम से ऐसी सर्विस मौजूद हैं लेकिन तीन करोड़ से भी ज़्यादा डाउनलोड होने के बाद 'टेक्स्टमी' शायद बढ़िया विकल्प है.
अमरीका और यूरोप में ड्यूल सिम वाले स्मार्टफोन नहीं चलते हैं इसलिए ऐसी सुविधा काफी काम की है.
लेकिन भारत में भी, जहां ड्यूल फ़ोन सिम चलते हैं, आप इसका भी इस्तेमाल कर सकते हैं.
फ़रारी की नई कार है फ़रारी वी8 ओपन टॉप मॉडल, जो शून्य से 60 मील प्रति घंटे की रफ्तार महज़ 3 सेकेंड में हासिल कर सकती है.
इस कार की अधिकतम रफ़्तार 203 मील प्रति घंटे की हो सकती है, यानी लगभग 324 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड.
ये कार इन दिनों चल रहे फ्रैंकफर्ट मोटर शो के दौरान प्रदर्शित की जा रही है.
ढलान, मोड़ पर चलाना आसान
यह 488 स्पाइडर कार मॉडल पिछले 458 स्पाइडर की तुलना में 23 फ़ीसदी ज़्यादा टॉर्शनल रिजिडिटी वाली है. टॉर्शनल रिजिडिटी का मतलब है तेज़ रफ़्तार पर मुड़ते समय वाहन का स्टेबल रह पाना.
इस कार के इंजन की क्षमता 661 बीएचपी की है. 560 पाउंड फ़ीट वाले टर्बो चार्जड वी8 इंजन वाली इस कार का वजन 1525 किलोग्राम है.
यह कार 8.7 सेकेंड में 124 मील प्रति घंटे की रफ़्तार तक पहुंच सकती है. इसका मतलब ये हुआ कि पिछली फ़रारी 458 स्पाइडर की तुलना में ये कार 12 प्रतिशत तेजी है.
इस कार को ढलान और मोड़ों पर चलाना कहीं ज्यादा आसान होगा.
458 स्पाइडर की तुलना में इस कार की छत को आसानी से हटाया जा सकता है. इलेक्ट्रानिकली इसकी छत को बटन दबाते ही हटाना संभव होगा.
एयरोडायनामिक्स के लिहाज से भी कार बेहतर है. इसमें अंडर बॉडी वोर्टेक्स जेनरेटर लगा हुआ है.
इसको पूरी रफ़्तार से चलाने पर ये आवाज़ भी ख़ूब पैदा करेगी.
इस कार की कीमत की घोषणा अभी नहीं हुई है, लेकिन अमरीका में पिछली फ़रारी 458 स्पाइडर कार की कीमत 2.7 लाख डॉलर से शुरू होती है. ऐसे में 488 स्पाइड की कीमत इससे ज़्यादा ही होगी.
कार की क़ीमत चाहे ज़्यादा है लेकिन फ़रारी की कार पैसा वसूल होती है.
2014 में ब्रिटेन के देहात में एक बड़े फ़ार्म की देखरेख करने वाले माली की अचानक मौत हो गई. उसके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था.
उसकी मौत क्यों हुई, इसकी वजह का पता नहीं चल पा रहा था. लेकिन मुकदमे के दौरान सबूत पेश हुए कि उसकी मौत फूलों के एक लोकप्रिय पौधे की वजह से हुई.
इस फूल वाले पौधे का नाम है एकोनिटम. इसके खिले हुए फूल के कई नाम हैं जैसे - भेड़िए का दुश्मन, शैतान की हेलमेट, क्वीन ऑफ़ प्वायजन्स.
इन नामों से इसकी ख़ासियत का अंदाज़ा लगाया जा सकता है. सच यही है कि एकोनिटम दुनिया का सबसे ख़तरनाक पौधा है क्योंकि ये हार्ट की गति को धीमा कर देता है जिससे मौत हो जाती है.
इसका सबसे ज़हरीला हिस्सा होता है जड़. लेकिन पत्तों में भी ज़हर होता है. दोनों में न्यूरोटॉक्सिन होते हैं, यानी वो ज़हर जो दिमाग पर असर करता है. इसे त्वचा भी सोख सकती है.
कड़ी ने ली जान
जब ये फूल, पत्ते या इसकी जड़ त्वचा से संपर्क में आते हैं तो वहाँ झुनझुनी पैदा होती है, वह हिस्सा अकड़ने लगता है. अगर ग़लती से इसे खा लिया जाए तो उल्टी और दस्त का दौर शुरू हो जाता है.
2010 में ब्रिटेन में भारतीय मूल की एक महिला लखवीर सिंह को हत्या का दोषी पाया गया था. उन्होंने अपने प्रेमी को कड़ी में इंडियन एकोनाइट मिला कर दे दिया था.
इसके कारण प्रेमी की पाचन शक्ति तो गड़बड़ा ही गई, साथ ही उसके हृदय की गति धीमी हो गई जिसके चलते उसकी मौत हो गई.
लेकिन हर बार ऐसा हो, ये जरूरी नहीं है. विशेषज्ञ जॉन रॉर्बटसन के मुताबिक हमारी उल्टी करने की क्षमता के कारण कई लोग अपनी कहानी बताने के लिए बच भी जाते हैं.
राबर्टसन कहते हैं, "मैंने उन लोगों से बात की है, जो इसे खाने के बाद भी जीवित थे. एक दंपत्ति ने ग़लती से इसकी पत्तियों को सलाद में इस्तेमाल कर लिया. अगले 24 घंटे तक दोनों की स्थिति बेहद ख़राब रही लेकिन दोनों बच गए."
आम मान्यता ये है कि पौधों में ये टॉक्सिन या ज़हर ख़ुद की सुरक्षा के लिए विकसित हुआ है. इसके चलते यह पौधा कीटों और जानवरों से अपना बचाव कर पाता है.
संपर्क ख़तरनाक
ऐसा ही एक पौधा है हॉगवीड (हेरेसलियम मांटेगाज़िएनम). अगर यह इंसानों की त्वचा के संपर्क में आए और फिर सूर्य की रोशनी से रिएक्ट करे तो त्वचा पर जलन उत्पन्न करने लगता है. हालांकि गाजर, अजवाइन और नींबू के पौधों में भी यह गुण होता है और बुरी परिस्थितियों में ये पौधे त्वचा पर छाले कर सकते हैं.
इसी तरह दक्षिणी अमरीका के उत्तरी हिस्से यानी फ्लोरिडा और कैरेबियाई द्वीप में भी उगने वाला पौधा मैनकीनील (हिप्पोमाने मैनकीनीला) को छूना भी ख़तरनाक माना जाता है. इसे भी दुनिया के ख़तरनाक पौधों में एक माना जाता है. इसके आसपास चेतावनी के संकेत वाला बोर्ड भी आपको नज़र आ सकता है.
इस पौधे के नीचे बारिश में खड़ा होना भी ख़तरनाक हो सकता है. इसके पत्तों से टकरा कर आने वाला पानी भी त्वचा को काफी नुकसान पहुंचाता है. इन पौधों को जलाना भी ख़तरनाक हो सकता है. इसके धुंए के संपर्क में आने से आंखों की रोशनी तक जा सकती है और सांस की समस्या भी हो सकती है.
'लिटिल एप्पल ऑफ़ डेथ'
जाहिर है मैनकीनील पौधे का असर तो अच्छा नहीं होता है, लेकिन इसके संपर्क में आने से आपकी मौत नहीं होगी. लेकिन अगर इसके छोटे से फल को किसी ने खा लिया तो मौत का खतरा हो सकता है.
इस फल का स्पेनिश नाम है लिटिल एप्पल ऑफ़ डेथ. इस फल को खाने से उल्टी और दस्त से पूरे शरीर का पानी बाहर निकल जाता है और मौत हो जाती है.
इसके अलावा रिकिनस कोमूनिस की झाड़ी भी बेहद ख़तरनाक होती है. इस पौधे की बीज से ही केस्टर आयल (अरंडी का तेल) निकलता है. इस पौधे के साइंटिफिक लेटिन नाम है राइसिन. इस वजह से अरंडी के पौधे को दुनिया के सबसे ज़हरीला पौधों में से एक माना जाता है.
इसके बीज से तेल निकालने के बाद बचे हिस्से में भी काफ़ी टॉक्सिन मौजूद होते हैं. राइसिन मेटाबॉलिज्म की कोशिकाओं को नष्ट करता है. ये कोशिकाएं जीवन के लिए बेहद आवश्यक होती हैं. इससे उल्टी और दस्त शुरू हो सकती है और एक सप्ताह के अंदर अंग काम करना बंद कर देते हैं और मौत हो सकती है.
लेकिन सवाल यह है कि इतने ख़तरनाक पौधों को हम बगीचे में क्यों उगाते हैं.
अरंडी भी है ज़हरीला
जॉन राबर्टसन बताते हैं, "ज़हरीला और हानिकारक होने में अंतर है. आप ये आसानी से कह सकते हैं कि कौन सा पौधा ज़हरीला है, उसमें कौन सा टॉक्सिन है और उससे क्या हो सकता है? लेकिन अगर आप उसे खाना चाहें तभी वह नुकसानदायक हो सकता है."
अरंडी का बीज शरीर में पचता नहीं है और यदि निगल लिया जाए तो शरीर को ज्यादा नुकसान पहुंचाए बिना ही बाहर निकल जाता है. लेकिन यदि इसके पांच बीज चबा लिए जाएँ और फिर पेट में पहुँच जाए तो ये खुराक घातक साबित होगी. बच्चों के लिए एक ही काफी है. अगर इसे इंजेक्शन के तौर पर दिया जाए तो यह और भी ख़तरनाक होता है.
इसी तरह का ज़हरीला पौधा है अबरीन. इसका बीज भी ख़तरनाक होता है. यह काफी हद तक राइसिन से मिलता जुलता है लेकिन यदि ये शुद्ध हो और पाउडर की तरह खाया जाए, तभी खतरनाक है. हालांकि इसका बाहरी कवच काफी सख़्त होता है लिहाजा इसे पचाना और भी मुश्किल होता है.
वैसे आधुनिक चिकित्सा जगत में ज़हरीले पौधों की वजह से मौत के मामले दुर्लभ ही हैं. लेकिन इन पौधों के बारे में जानने से ख़तरा कम जरूर हो जाता है.
दुनिया भर के कार निर्माताओं में लेक्सस की पहचान अनुभवी और अलग अलग तरह की कारें बनाने वाली कंपनी के तौर पर है.
लेक्सस ने अब एक ख़ास तरह के कार्डबोर्ड वाली इलेक्ट्रिक कार बनाई है. लेक्सस ने इसके लिए ब्रिटेन स्थित लेज़रकट वर्क्स और स्केल्स एंड मॉडल्स के पांच डिज़ाइनरों की टीम को कार्डबोर्ड वाली कार बनाने की ज़िम्मेदारी सौंपी.
इस टीम की मदद पैकेजिंग मैटेरियल बनाने के विशेषज्ञ डीएस स्मिथ ने की. उनकी सलाह के बाद टीम ने ये ख़ास कार तैयार कर दी है.
कार्डबोर्ड से बनी ये कार फ़ुल साइज़ की सेडान की रेप्लिका दिखती है, लेकिन पूरी तरह से काम में आ सकती है.
इस कार को बनाने में स्टील और एल्यूमिनियम के फ्रेम का इस्तेमाल किया गया है. इसके अलावा लेज़र से कटे हुए 1700 कंप्रेसेड (बाहरी दबाव डालकर ठोस बनाने की प्रक्रिया) गत्ते वाले कार्डबोर्ड का इस्तेमाल किया गया है, जिसे पूरी तरह से रिसाइकल किया जा सकता है.
इस कार का अपना शानदार इंटीरियर है, काम में आने लायक दरवाज़े हैं. एकदम चलने, बुझने वाली हेडलाइट है और तेज़ी से भागने वाले चक्के भी हैं.
इतना ही नहीं कार में इलेक्ट्रिक मोटर भी लगी हुई है. वैसे ये कार्ड बोर्ड का बना बक्सा भर नहीं है, बल्कि पूरी तरह चलाने लायक इलेक्ट्रिक कार है.
डिजिटल 3डी तकनीक के जरिए मूल रूप से टीम ने कार बनाने की प्रक्रिया को कई भागों में विभक्त किया है- मुख्य बॉडी, डैशबोर्ड, सीट्स, व्हील्स और काफ़ी कुछ और...
इसके बाद कार के सभी हिस्सों को डिजटली 10 मिलीमीटर मोटे फांकों में विभक्त किया गया. इन आंकड़ों को लेज़र कटर में फीड किया गया. इसके बाद कार को बनाने में इस्तेमाल किए गए 1700 कार्ड बोर्ड को काटा गया. इन सबको ख़ास अलग अलग नंबर दिए गए.
इन कार्ड बोर्ड को एक ख़ास तरह के वुड ग्लू से जोड़ा जाता है. इस तरह से कार को तैयार करने में छह महीने का वक्त लगता है.
हालांकि इस तरह से कार को बनाने में कुछ मुश्किलें भी आईं. स्केल्स एंड मॉडल्स कंपनी के संस्थापक और निदेशक रुबेन मार्कोस ने कहा, "सीट्स को बनाने में कई बार कोशिश करनी पड़ी और चक्के को बनाने में कई बार चीज़ों को फ़ाइन ट्यून करना पड़ा."
मार्कोस ने कहा, "अब जब कार ने आकार ले लिया है तो हम इसमें आगे भी सुधार कर सकते हैं. हर उत्पाद की तरह इसमें भी ट्रायल और एरर की जगह होगी. लेकिन हमने इसे इन हाउस संसाधनों से ही तैयार किया है. इसमें आसानी से बदलाव और सुधार संभव हैं."
लेक्सस ने अपने इस कार को बर्मिंघम के ग्रैंड डिज़ाइन लाइव में आधिकारिक तौर पर पेश किया है.
2014 में ब्रिटेन के देहात में एक बड़े फ़ार्म की देखरेख करने वाले माली की अचानक मौत हो गई. उसके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था.
उसकी मौत क्यों हुई, इसकी वजह का पता नहीं चल पा रहा था. लेकिन मुकदमे के दौरान सबूत पेश हुए कि उसकी मौत फूलों के एक लोकप्रिय पौधे की वजह से हुई.
इस फूल वाले पौधे का नाम है एकोनिटम. इसके खिले हुए फूल के कई नाम हैं जैसे - भेड़िए का दुश्मन, शैतान की हेलमेट, क्वीन ऑफ़ प्वायजन्स.
इन नामों से इसकी ख़ासियत का अंदाज़ा लगाया जा सकता है. सच यही है कि एकोनिटम दुनिया का सबसे ख़तरनाक पौधा है क्योंकि ये हार्ट की गति को धीमा कर देता है जिससे मौत हो जाती है.
इसका सबसे ज़हरीला हिस्सा होता है जड़. लेकिन पत्तों में भी ज़हर होता है. दोनों में न्यूरोटॉक्सिन होते हैं, यानी वो ज़हर जो दिमाग पर असर करता है. इसे त्वचा भी सोख सकती है.
कड़ी ने ली जान
जब ये फूल, पत्ते या इसकी जड़ त्वचा से संपर्क में आते हैं तो वहाँ झुनझुनी पैदा होती है, वह हिस्सा अकड़ने लगता है. अगर ग़लती से इसे खा लिया जाए तो उल्टी और दस्त का दौर शुरू हो जाता है.
2010 में ब्रिटेन में भारतीय मूल की एक महिला लखवीर सिंह को हत्या का दोषी पाया गया था. उन्होंने अपने प्रेमी को कड़ी में इंडियन एकोनाइट मिला कर दे दिया था.
इसके कारण प्रेमी की पाचन शक्ति तो गड़बड़ा ही गई, साथ ही उसके हृदय की गति धीमी हो गई जिसके चलते उसकी मौत हो गई.
लेकिन हर बार ऐसा हो, ये जरूरी नहीं है. विशेषज्ञ जॉन रॉर्बटसन के मुताबिक हमारी उल्टी करने की क्षमता के कारण कई लोग अपनी कहानी बताने के लिए बच भी जाते हैं.
राबर्टसन कहते हैं, "मैंने उन लोगों से बात की है, जो इसे खाने के बाद भी जीवित थे. एक दंपत्ति ने ग़लती से इसकी पत्तियों को सलाद में इस्तेमाल कर लिया. अगले 24 घंटे तक दोनों की स्थिति बेहद ख़राब रही लेकिन दोनों बच गए."
आम मान्यता ये है कि पौधों में ये टॉक्सिन या ज़हर ख़ुद की सुरक्षा के लिए विकसित हुआ है. इसके चलते यह पौधा कीटों और जानवरों से अपना बचाव कर पाता है.
संपर्क ख़तरनाक
ऐसा ही एक पौधा है हॉगवीड (हेरेसलियम मांटेगाज़िएनम). अगर यह इंसानों की त्वचा के संपर्क में आए और फिर सूर्य की रोशनी से रिएक्ट करे तो त्वचा पर जलन उत्पन्न करने लगता है. हालांकि गाजर, अजवाइन और नींबू के पौधों में भी यह गुण होता है और बुरी परिस्थितियों में ये पौधे त्वचा पर छाले कर सकते हैं.
इसी तरह दक्षिणी अमरीका के उत्तरी हिस्से यानी फ्लोरिडा और कैरेबियाई द्वीप में भी उगने वाला पौधा मैनकीनील (हिप्पोमाने मैनकीनीला) को छूना भी ख़तरनाक माना जाता है. इसे भी दुनिया के ख़तरनाक पौधों में एक माना जाता है. इसके आसपास चेतावनी के संकेत वाला बोर्ड भी आपको नज़र आ सकता है.
इस पौधे के नीचे बारिश में खड़ा होना भी ख़तरनाक हो सकता है. इसके पत्तों से टकरा कर आने वाला पानी भी त्वचा को काफी नुकसान पहुंचाता है. इन पौधों को जलाना भी ख़तरनाक हो सकता है. इसके धुंए के संपर्क में आने से आंखों की रोशनी तक जा सकती है और सांस की समस्या भी हो सकती है.
'लिटिल एप्पल ऑफ़ डेथ'
जाहिर है मैनकीनील पौधे का असर तो अच्छा नहीं होता है, लेकिन इसके संपर्क में आने से आपकी मौत नहीं होगी. लेकिन अगर इसके छोटे से फल को किसी ने खा लिया तो मौत का खतरा हो सकता है.
इस फल का स्पेनिश नाम है लिटिल एप्पल ऑफ़ डेथ. इस फल को खाने से उल्टी और दस्त से पूरे शरीर का पानी बाहर निकल जाता है और मौत हो जाती है.
इसके अलावा रिकिनस कोमूनिस की झाड़ी भी बेहद ख़तरनाक होती है. इस पौधे की बीज से ही केस्टर आयल (अरंडी का तेल) निकलता है. इस पौधे के साइंटिफिक लेटिन नाम है राइसिन. इस वजह से अरंडी के पौधे को दुनिया के सबसे ज़हरीला पौधों में से एक माना जाता है.
इसके बीज से तेल निकालने के बाद बचे हिस्से में भी काफ़ी टॉक्सिन मौजूद होते हैं. राइसिन मेटाबॉलिज्म की कोशिकाओं को नष्ट करता है. ये कोशिकाएं जीवन के लिए बेहद आवश्यक होती हैं. इससे उल्टी और दस्त शुरू हो सकती है और एक सप्ताह के अंदर अंग काम करना बंद कर देते हैं और मौत हो सकती है.
लेकिन सवाल यह है कि इतने ख़तरनाक पौधों को हम बगीचे में क्यों उगाते हैं.
अरंडी भी है ज़हरीला
जॉन राबर्टसन बताते हैं, "ज़हरीला और हानिकारक होने में अंतर है. आप ये आसानी से कह सकते हैं कि कौन सा पौधा ज़हरीला है, उसमें कौन सा टॉक्सिन है और उससे क्या हो सकता है? लेकिन अगर आप उसे खाना चाहें तभी वह नुकसानदायक हो सकता है."
अरंडी का बीज शरीर में पचता नहीं है और यदि निगल लिया जाए तो शरीर को ज्यादा नुकसान पहुंचाए बिना ही बाहर निकल जाता है. लेकिन यदि इसके पांच बीज चबा लिए जाएँ और फिर पेट में पहुँच जाए तो ये खुराक घातक साबित होगी. बच्चों के लिए एक ही काफी है. अगर इसे इंजेक्शन के तौर पर दिया जाए तो यह और भी ख़तरनाक होता है.
इसी तरह का ज़हरीला पौधा है अबरीन. इसका बीज भी ख़तरनाक होता है. यह काफी हद तक राइसिन से मिलता जुलता है लेकिन यदि ये शुद्ध हो और पाउडर की तरह खाया जाए, तभी खतरनाक है. हालांकि इसका बाहरी कवच काफी सख़्त होता है लिहाजा इसे पचाना और भी मुश्किल होता है.
वैसे आधुनिक चिकित्सा जगत में ज़हरीले पौधों की वजह से मौत के मामले दुर्लभ ही हैं. लेकिन इन पौधों के बारे में जानने से ख़तरा कम जरूर हो जाता है.